WallPaper
हिन्दी
nature

सड़कें और वह बिंदु जहाँ वे सड़क नहीं रह जातीं

ज़मीन पर कभी न मिलने वाले दो किनारे तस्वीर में मिलने को राज़ी हो जाते हैं।

सड़क दोनों सिरों पर एक ही चौड़ाई की होती है, और किसी तस्वीर ने आज तक यह बात नहीं मानी। दोनों किनारे एक-दूसरे की ओर झुकते जाते हैं और आख़िर वहाँ छू जाते हैं, जो कोई जगह नहीं, बस एक तय है जिस पर आँख अड़ी रहती है। फ़्रेम की बाक़ी हर चीज़ — बाड़ के खूँटे, खंभे, पेड़ों के बीच के अंतराल — उसी तय के पीछे कतार में लग जाती है और रास्ते भर छोटी होती जाती है।

वह मिलन-बिंदु कहाँ पड़ता है, यही तस्वीर का स्वभाव तय करता है। बीचोंबीच रखिए तो सड़क तीर बन जाती है: सुघड़, और थोड़ी हुक्म चलाती हुई। एक-तिहाई पर खिसकाइए तो वही सड़क आदेश से निमंत्रण में बदल जाती है। क्षितिज ऊपर उठाइए तो फ़्रेम ज़मीन का हो जाता है, नीचे कीजिए तो आसमान का, और सड़क चुपचाप दोनों के बीच की बहस बन जाती है।

कुहरा यह बहस पहले ही ख़त्म कर देता है। बिंदु पाँच किलोमीटर पर नहीं, पचास मीटर पर आ जाता है, और सड़क दूरी होना छोड़कर दरवाज़ा बन जाती है। स्क्रीन पर ऐसी तस्वीर दूर तक फैले नज़ारे से ज़्यादा टिकती है: आँख को जाने की जगह मिलती है, वह एक पल में पहुँच जाती है, और वहाँ पीली-सफ़ेद हवा के सिवा कुछ नहीं मिलता।

धान की सीढ़ीदार खेती 4K वॉलपेपर · प्रकृति · 3840×2560
01धान की सीढ़ीदार खेती 4K वॉलपेपर4K
धान की सीढ़ीदार खेती 4K वॉलपेपर · प्रकृति · 3840×2560
02धान की सीढ़ीदार खेती 4K वॉलपेपर4K

इस संग्रह में

सभी वॉलपेपर देखें