nature
झरने, रेशम में बदलते हुए
लंबी एक्सपोज़र पानी को धुँधला नहीं करती। वह आपको दिखाती है कि समय पानी के भीतर से गुज़रते हुए कैसा दिखता है।
किसी झरने पर कैमरा एक सेकंड के पाँच-सौवें हिस्से के लिए तानें तो अफ़रा-तफ़री मिलती है — बूँदें, फुहार, उग्रता। शटर को दो सेकंड खुला छोड़ दें तो वही पानी रेशम बन जाता है। कोई तस्वीर ज़्यादा सच्ची नहीं होती। एक दिखाती है पानी क्या है; दूसरी दिखाती है वह क्या करता है।
यहाँ की तस्वीरें दूसरी तरह की हैं। चिकने पानी और नुकीली चट्टान के बीच कुछ ऐसा है जो होम स्क्रीन को शांत कर देता है — आवाज़ धीमी करने का दृश्य रूप।
इन तस्वीरों में काई ज़रूर देखें। जहाँ भी पानी स्थायी है, वहाँ हरापन पीछे-पीछे आता है — फ़ोटोग्राफ़र को बस वहाँ खड़ा होना है जहाँ फुहार सदियों से खड़ी है।
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